भारत का राष्ट्रपति कैसे बने-2021 पूर्ण जानकारी ? how to become president of india In hindi

नमस्कार पाठको, आज के लेख में हम भारत गणराज्य (राज्यों का समूह) के राष्ट्रपति के बारे में जानने का प्रयास करेंगे। आज के लेख में जानेंगे की भारत का राष्ट्रपति कैसे बने, भारत का राष्ट्रपति कौन होता है, कैसे भारत का राष्ट्रपति बना जा सकता है, भारत के संविधान में वे कौन से भाग व आर्टिकल है जो भारत के राष्ट्रपति के लिए निर्देशित है।

इसी के साथ हम यह भी जानने का प्रयास करेंगे की भारत गणराज्य के राष्ट्रपति के कार्य, उनके कार्यकाल, उनकी शक्तियों के बारे में जानेंगे।

तो चलिए शुरू करते है-

श्री राम नाथ कोविन्द।
श्री राम नाथ कोविन्द।

भारत का राष्ट्रपति कौन होता है।

भारत का राष्ट्रपति भारत का प्रथम व्यक्ति माना जाता है, भारत का राष्ट्रपति वह माध्यम होगा जिसके जरिये देश में लागू होने वाले किसी भी बिल को कानून की शक्ल दी जाएगी।

भारत की थल सेना, वायु सेना, व जल सेना को भारत का सशस्त्र बल भी कहा जाता है, भारत का राष्ट्रपति इन तीनो सेनाओं का सुप्रीम कमांडर होता है, और भारत के राष्ट्रपति के आदेश के बाद ही यह सेनायें किसी भी युद्ध को आरंभ या समाप्त करती है।

भारत के संविधान के भाग 5, अनुच्छेद 52 से लेकर 62 तक सब कुछ राष्ट्रपति जी के बारे में उल्लेखित है। जिनकी चर्चा नीचे दी गयी है। इसी के साथ भारत का राष्ट्रपति, भारत की कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा विधायिका (कानून बनाने की संरचना/संसद) के ऑफिशियल चीफ भी होते है।

भारत के संविधान में राष्ट्रपति के बारे में चर्चा-

भारत के संविधान के भाग 5 जिसमे अनुच्छेद 52 से लेकर 62 तक का पूरा खंड ही आ जाता है, में भारत के राष्ट्रपति के बारे में हर वह चीज़ निर्देशित करी है जिसके बारे में आपका जानना जरूरी है।

आईये संक्षिप्त में इन सब के बारे में जाने।

भारतीय संविधान भाग 5,

अनुच्छेद 52 –

अनुच्छेद 52 में कहा गया है की भारत गणराज्य का एक राष्ट्रपति होगा।

अनुच्छेद 53 –

अनुच्छेद 53 में कहा गया है की भारत का जो राष्ट्रपति होगा वो संघ/केंद्र की कार्यकारी शक्ति होती। हम जानते है कि भारत की केंद्र सरकारे अपने कार्यकारी काम कानून और इन सब तरीकों से करते है, तो जब तक केंद्र के इन कानून पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर नहीं होते, तब तक वे कानून बिल की शक्ल में रहते है। उन्हें कानून बनाने के लिए राष्ट्रपति के हस्ताक्षर चाहिए होते है।

अनुच्छेद 54, 55 –

अनुच्छेद 54-55 में राष्ट्रपति के चुनाव के बारे में गाइडलाइन्स दी गयी है जिनके अनुसार एक राष्ट्रपति का चुनाव होता है।

अनुच्छेद 56 –

अनुच्छेद 56 में राष्ट्रपति जी के कार्यकाल के बारे में बताया गया है जो की साधारण अवस्था में 5 साल का होता है और विभिन्न परिस्थितियों में बढ़ाया या घटाया भी जा सकता है। (घटाने से मतलब उन्हें समय से पूर्व हटाया भी जा सकता है)

अनुच्छेद 57 –

अनुच्छेद 57 में बताया गया है कि यदि एक राष्ट्रपति फिर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनता है तो उसके लिए कौन कौन से नियम तथा रीति रिवाज होंगे।

अनुच्छेद 58 –

अनुच्छेद 58 में बताया गया है कि यदि एक व्यक्ति राष्ट्रपति बनना चाहता है तो उसमे क्या क्या योग्यताएं होनी चाहिए।

अनुच्छेद 59 –

अनुच्छेद 59 में बताया गया है कि यदि कोई उम्मीदवार राष्ट्रपति बनना चाहता है तो, यदि वह राष्ट्रपति बन जाता है तो उसके बाद वे कौन कौन सी शर्ते है जिनका उसे पालन करना पड़ेगा। यदि वह उन शर्तों का पालन नाह करेगा तो उसे शुघ्रा ही उसके पद से हटा दिए जाने की अभिक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

अक्सर लोग अनुच्छेद 59 को अनुच्छेद 58 (योग्यताओं) से भ्रमित कर लेते है, योग्यताये राष्ट्रपति बनने से पहले लागू होती है, शर्ते राष्ट्रपति बनने के बाद लागू होती है

अनुच्छेद 60 –

अनुच्छेद 60 में राष्ट्रपति के प्रतिज्ञा के बारे में बताया गया है कि राष्ट्रपति अपनी शपथ भारतीय सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस या उनकी अनुपस्थिति में जो सुप्रीम कोर्ट में उस समय का सबसे वरिष्ट न्यायाधीश होता है, उनकी उपस्थिति में भारतीय संविधान की रक्षा की शपथ लेते है।

अनुच्छेद 61 –

अनुच्छेद 61 में राष्ट्रपति को हटाने की अभिक्रिया (महाभियोग) के बारे में बताया गया है।

अनुच्छेद 62 –

अनुच्छेद 62 में राष्ट्रपति के रिक्त पद को भरने के लिए चुनाव के समय तथा आकस्मिक रिक्ति भरने के लिए आने वाले नए राष्ट्रपति के कार्यकाल के बारे में बताया गया है।

भारत का राष्ट्रपति कैसे बने

भारत का राष्ट्रपति बनने के लिए आपमें कुछ योग्यताओं का होना जरूरी है वे योग्यताये निचे दी हुई है-

  • उम्मीदवार भारत का नागरिक हो।
  • उम्मीदवार ने पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर ली हों।
  • उम्मीदवार लोक सभा के सदस्य के रूप में चुनाव के लिए योग्य है।
  • उम्मीदवार राष्ट्रपति के रूप में चुनाव के लिए पात्र नहीं होगा यदि वह भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन या किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकरण के अधीन किसी भी सरकार के अंतर्गत कोई ऐसा पद लेता है जिससे उसे कोई मोटा मुनाफा होता हो या वह कोई लाभ का पद हो।

नोट:- किसी व्यक्ति को केवल इस कारण से लाभ का पद धारण करने वाला नहीं समझा जाएगा कि वह संघ का राष्ट्रपति या उपाध्यक्ष या किसी राज्य का राज्यपाल है या संघ का मंत्री है।

इसके बाद राष्ट्रपति के चुनाव होते है-

राष्ट्रपति का चुनाव एक चुनाव मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाएगा जिसमें-
संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य; और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली और पांडिचेरी संघ राज्य क्षेत्र भी इसी में शामिल हैं।

ज्यादातर परिस्थितियों में केंद्र सरकार जिस व्यक्ति को राष्ट्रपति के पद के लिए उम्मीदवार बनती है, वही राष्ट्रपति बनता है।

राष्ट्रपति की शक्तियां

भारत के राष्ट्रपति के पास निम्न प्रकार की शक्तियां होती है :-

1.  विधायी शक्तियां

2.  कार्यकारी या नियुक्ति शक्तियां

3.  न्यायिक शक्तियां

4.  वित्तीय शक्तियां

5.  राजनयिक शक्तियां

6.  सैन्य शक्तियां

7.  क्षमा शक्तियां

8.  आपातकालीन शक्तियां

राष्ट्रपति के कार्य

1. केंद्र की कार्यकारी, विधायी, और न्यायिक कार्य सब राष्ट्रपति जी के नाम पर होती है, और राष्ट्रपति जी संघ की इन तीनो शक्तियों/कार्यों के मुखिया होते है।

2. राष्ट्रपति जी, राज्यों में राज्यपालों के नियोक्ता के रूप में भी कार्य करते है, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति भी राष्ट्रपति जी ही करते है।

3. संघ लोक सेवा आयोग व उनके सदस्यों, वित्त आयोग, चुनाव आयोग व उनके सदस्यों, ऑडिटर जनरल ऑफ़ india सहित और भी राष्ट्रपति जी नियुक्त करते है।

4. प्रधान मंत्री के साथ साथ केंद्रीय मंत्रियों को भी राष्ट्रपति जी ही नियुक्त करते है।

5. राष्ट्रपति जी, प्रधान मंत्री जी को किसी भी समय लोकसभा में अपना बहुमत साबित करने को कह सकते है।

6. इसी के साथ भारत की तीनों सेनाओं के प्रमुख के रूप में तो कार्य करते ही है।

7. राष्ट्रपति जी की शक्तियां व कार्य सीमित है किन्तु बहुत सारी है। राष्ट्रपति जी के कार्य अलग अलग उद्देश्य के लिए अलग अलग होते है।

राष्ट्रपति का कार्यकाल

भारत में राष्ट्रपति का कार्यकाल साधारण रूप से 5 वर्षों का होता है।

लेकिन इसमें कुछ अपवाद भी है

1.   यदि लोकसभा विघटित हो चुकी हो तो राष्ट्रपति जी तब तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेंगे जब तक लोकसभा फिर से कार्यरत न हो जाये।

2.   यदि राष्ट्रपति जी इस्तीफा दे देते है तो आने वाले नए राष्ट्रपति जी भी 5 वर्षों तक कार्यभार संभालेंगे।

3.   यदि आकस्मिक कारणों से राष्ट्रपति का पद खाली होता है तो इसके बाद पुनः चुनाव के बाद आये राष्ट्रपति जी उतने ही समय के लिए राष्ट्रपति जी रहेंगे जितना समय पहले वाले राष्ट्रपति जी के पास बचा था।

निष्कर्ष

तो आज हमने भारत का राष्ट्रपति कैसे बने के बारे में में जाना और उनसे सम्बंधित विभिन्न आयामों की जानकारी भी ली. अगर आप इससे सम्बंधित कोई भी जानकरी लेना चाहते है या अपना कोई सुझाव देना चाहते है तो हमे कमेंट करके जरूर बताये हमे आपका जवाब देने में ख़ुशी होंगी यदि आपको हमारा लेख पसंद आया हो तो कृपया इसे अपने मित्रों व सगे सम्बन्धियों तक जरूर शेयर करे.

धन्यवाद.

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